उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: रक्षा और एयरोस्पेस का नया केंद्र
Uttar Pradesh Defence Industrial Corridor:
लखनऊ। Uttar Pradesh Defence Industrial Corridor: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजनरी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब केवल एक्सप्रेसवे का प्रदेश नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के केंद्र के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2018 में स्थापित उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) आज भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता का नया दस्तावेज बन चुका है। यूपीडा (UPEIDA) द्वारा विकसित किए जा रहे इस कॉरिडोर के छह रणनीतिक नोड्स—कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट—प्रदेश को दुनिया के रक्षा मानचित्र पर स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
निवेश की गर्जना: 35,526 करोड़ के प्रस्ताव
कॉरिडोर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक विभिन्न नोड्स के लिए 35,526 करोड़ से अधिक के भारी-भरकम निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए अधिग्रहीत 2,040 हेक्टेयर भूमि में से 977.54 हेक्टेयर पहले ही आवंटित की जा चुकी है। वर्तमान में 62 से अधिक कंपनियां कॉरिडोर में अपना आधार तैयार कर रही हैं, जो यूपी की औद्योगिक नीति पर निवेशकों के अटूट विश्वास को दर्शाता है।
प्रमुख निवेश और उत्पादन का आगाज
भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नौ प्रमुख विनिर्माण इकाइयों ने कॉरिडोर में उत्पादन शुरू कर दिया है। इसमें सबसे बड़ा नाम अदानी डिफेंस सिस्टम्स का है, जिसने कानपुर में 1,500 करोड़ के निवेश से विशाल गोला-बारूद संयंत्र स्थापित किया है। अलीगढ़ नोड में अमिटेक इलेक्ट्रॉनिक्स सैटेलाइट तकनीक पर काम कर रही है, तो वहीं वेरीविन डिफेंस छोटे हथियारों के निर्माण से सेना को मजबूती प्रदान कर रही है
लखनऊ बना मिसाइल और तकनीक का केंद्र
राजधानी लखनऊ अब रक्षा तकनीक के नए केंद्र के रूप में चमक रही है। यहां ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा 300 करोड़ की लागत से 'ब्रह्मोस एनजी' मिसाइल सिस्टम के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। साथ ही, एरोलॉय टेक्नोलॉजीज टाइटेनियम कास्टिंग के जरिए एयरोस्पेस सेक्टर को नई ऊंचाई दे रही है। कानपुर में ए.आर. पॉलिमर्स और आधुनिक मेटेरियल जैसी कंपनियां बैलिस्टिक और डिफेंस टेक्सटाइल्स के उत्पादन से कॉरिडोर को नई गति दे रही हैं।
सशक्त यूपी, आत्मनिर्भर भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पंख लगाता यह कॉरिडोर केवल बड़ी फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं है। यह एमएसएमई (MSME), स्टार्टअप्स और नवाचार को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ रहा है। प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी उद्योग अनुकूल नीतियों के साथ यह कॉरिडोर आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन और तकनीकी विकास का सबसे बड़ा इंजन बनेगा, जिससे उत्तर प्रदेश देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।